कुल पेज दृश्य

अश्विनी यादव लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अश्विनी यादव लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

सोमवार, 6 फ़रवरी 2023

ग़ज़ल

तुम्हारे दिल में भी तूफ़ाँ उठा है
हमें भी प्यार तुमसे हो चला है

किसी अय्यार जैसे हो गए हो
तुम्हारा नाम मुझको रट गया है

तुम्हारी बात भी अब टालने में
मुझे अब ख़ुद से लड़ना पड़ रहा है

अजब सी कश्मकश है ज़िन्दगी में
कि मेरा मैं ही मुझसे जा रहा है

अभी तक मैं यहाँ पर सो रहा हूँ
मगर पिंजड़े का पंछी उड़ गया है

     ~ अश्विनी यादव

शनिवार, 30 अप्रैल 2022

नज़्म ~ फिर युद्ध नहीं होंगे

कोई भी दीवार
नहीं रोक सकती
प्रेम, परिंदे, गीत

कोई भी युद्ध
नहीं ला सकता
शांति, सुकूँ, मुस्कान

हम ज़्यादा से ज़्यादा
बात करें
और प्रेम करें
तब यक़ीनन सदियों तक
कोई युद्ध नहीं होंगे।

~ अश्विनी यादव

शनिवार, 12 फ़रवरी 2022

नज़्म

मैंने हर सम्त उसे चाहा है
बड़ी शिद्दत से
मुझको लगता है
वो मिल जाएगी
सच कहूँ तो
बड़ी तलब है मुझको
जाने किस रोज़ को
वो पास मेरे आएगी
उसे इस तरह से
चाह रहा हूँ अब तक
उस तक ख़बर ये आख़िर
कैसे जाएगी

~ अश्विनी यादव

शनिवार, 13 नवंबर 2021

ग़ज़ल

बंदगी रखिये भला क्या हर किसी से
सारे चेहरे लग रहे हैं मतलबी से

कब तलक नाराज़गी पर हम मनाएँ
आज रिश्ता तोड़ लो अपनी ख़ुशी से

आदमी ही आदमी का यार कब था
मिल रहे हैं लोग सबसे ज़्यादती से

ख़ुदकुशी बेहद बुरी है चीज़ प्यारे
शाइरी को भी मिलाओ ज़िन्दगी से

हो मुबारक तुमको ये रंगीन दुनिया
हमको लम्हें काटने हैं सादगी से
________________

  अश्विनी यादव

मंगलवार, 28 सितंबर 2021

और अलविदा कह न सका


 उससे बिछड़ते वक़्त मुझे ऐसा लगा कि कम से कम अलविदा तो बोल दूँ पर मेरे कंपकँपाते होंठो ने मेरा साथ न दिया.... मैं बस चुप बिल्कुल चुप मानो किसी बुत की तरह बस देखता रह गया।


उस लम्हे के साथ साथ हमेशा ही मुझे वसीम बरेलवी का एक शे'र याद आता है...


वो मेरे सामने ही गया और मैं

रास्ते की तरह देखता रह गया 


      किसी को भी ज़िन्दगी में इस ग़म की अमानत अगर मिली हो तो यक़ीन मानो वो बहुत सारे ग़मों को अपने अंदर समेटे हुए मुस्कुराते हुए जी सकता है। सच कहूँ तो ऐसे वेशकीमती ख़ज़ाने का भरपूर लुत्फ़ लेना चाहिए,,,, इस नश्तर से दुःख को पिरोने का हुनर आपको मिल जाये बस समझिये कि बर्बादी की खाक़ से एक और नायाब शायर पैदा हो जाएगा।


दुआ है दर्द को पिरोने का हुनर मिले सबको🙏❤️


     ~ अश्विनी यादव


( लिखी जा रही नॉवल में से इक छोटा सा हिस्सा )


सोमवार, 24 मई 2021

नज़्म

वैसे तो ये कहना ग़लत ही होगा
लेकिन फिर भी यक़ीन करना
हम दोनों की तकदीरों में
नहीं लिखा इस जनम में मिलना...

बहुत जतन कर चुका हूँ मैं भी
बहुत जतन कर चुकी हो तुम भी
हम दोनों से ख़फ़ा है दुनिया
सच से एकदम जुदा है दुनिया
इस दुनिया को नहीं पता है
क्या मुहब्बत, क्या चाहत है ?

हम दोनों को बतलाना था
सबको मुहब्बत तक लाना था
लेकिन ये होने से रहा अब
तुम भी सब कुछ भूल ही जाना
मत बतलाना किसी को कुछ भी
हम भी ऐसे जीते रहेंगें
दिल की कोई बात न सुनना
हरदम हँसकर बातें करना

हम दोनों को ख़ुश रहना है
मिलो कभी तो ध्यान रखना..
हम दोनों की तक़दीरों में
नहीं लिखा इस जनम में मिलना....
_________________
अश्विनी यादव

गुरुवार, 20 मई 2021

ग़ज़ल

रेतों में दफ़नाए हुये पहराए हुए लोग
क्या शौक़ से डूबे थे हम उतराए हुये लोग

हम इतने बुरे हैं यारों बदनामी वास्ते
चीलों को पसन्द हैं हम पगलाए हुए लोग

साहब ने कहा है मत बदनाम करो हमको
यूँ तैरो मत गंगा में ओ छिपाए हुए लोग

कितनी लाशें अब तक कुत्तों के हिस्सों में
चील-कौवे मछली को हम बँटवाए हुए लोग

है लाखों में मारा इक ज़ुल्मी पागल ने
आख़िर सच कैसे बोलें झुठलाए हुए लोग
 
     
       ~ अश्विनी यादव

शनिवार, 7 दिसंबर 2019

नई ग़ज़ल

ज़िन्दा रहते दिल का दर्द सुनाने वाले
कितने अच्छे होते हैं मर जाने वाले

मर जाते ही दुनिया को खूबी दिखती है
बदल रहें हैं किस्से भी बतलाने वाले

एक शजर ने वीराने में उम्र गुजारी
सूख गया तो आए उसे गिराने वाले

अंगारों को पार किया तब मर्कज़ आया
 कितने हैं मुझ ऐसे पैर जलाने वाले

इक दरिया सैलाब बना तो आफत आई
अब तक जाने कहां थे बांध बनाने वाले

ये दुनिया केवल मतलब से ही साथ रही
देखो फूँक रहे हैं प्यार जताने वाले

सब कहते हैं तू वापिस आ जा घर अपने
कब आयें हैं राह-ए-जन्नत जाने वाले

हाँ! मैं पागल हूँ, शायर हूँ, दूर रहो तुम
थक कर मुझसे हार गए समझाने वाले

_____________________
  अश्विनी यादव


बुधवार, 12 सितंबर 2018

कैनवास लेकर बैठो

तुम कैनवास लेकर बैठो
मैं तुम्हारे इर्द-गिर्द
खोया खोया सा मिलूँगा
अपनी सांसों में भिगोकर
चाहतों के रंग से
इक तस्वीर बना देना
जिसमें मेरी मुहब्बत
तुम्हारे लिए पागलपन
और हमारी कहानी
झलकती हो
हाँ जान बना देना...
    
      ― अश्विनी यादव​​