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शनिवार, 7 दिसंबर 2019

नई ग़ज़ल

ज़िन्दा रहते दिल का दर्द सुनाने वाले
कितने अच्छे होते हैं मर जाने वाले

मर जाते ही दुनिया को खूबी दिखती है
बदल रहें हैं किस्से भी बतलाने वाले

एक शजर ने वीराने में उम्र गुजारी
सूख गया तो आए उसे गिराने वाले

अंगारों को पार किया तब मर्कज़ आया
 कितने हैं मुझ ऐसे पैर जलाने वाले

इक दरिया सैलाब बना तो आफत आई
अब तक जाने कहां थे बांध बनाने वाले

ये दुनिया केवल मतलब से ही साथ रही
देखो फूँक रहे हैं प्यार जताने वाले

सब कहते हैं तू वापिस आ जा घर अपने
कब आयें हैं राह-ए-जन्नत जाने वाले

हाँ! मैं पागल हूँ, शायर हूँ, दूर रहो तुम
थक कर मुझसे हार गए समझाने वाले

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  अश्विनी यादव


शुक्रवार, 13 सितंबर 2019

नज़्म

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वो इक चेहरा था जो
वो जो नाम था उसका
हाँ सब याद है मुझको
कुछ भूला नही हूँ मैं
तब हर शख़्स अच्छा था
जो हमशक़्ल थे तेरे
जो हमनाम थे तेरे
यार तमाम लोग मुझे
अब पसन्द नही बिल्कुल
जिनसे शक़्ल मिलती है
या आवाज़ मिलती है
जिनके नाम तुझ से है
नफरत है मुझे सबसे
जिन्हें प्यार करता था
जिनकी बात करता था
नफरत है मुझे सबसे...
नफरत है मुझे तुमसे...
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अश्विनी यादव

शनिवार, 25 मई 2019

ज़िन्दगी

सुनो अजय तुम्हारा साथ बहुत अच्छा है, तुम सबका ख़याल रखने में अपना ख़याल रखना भूल जाते हो. लेकिन ये बार बार चाय पीने वाली आदत तुम्हें छोड़नी पड़ेगी। अभी डॉक्टर ने तुम्हें मना किया था न और मीठा भी कम दो वरना शुगर की शिकायत हो जाएगी.... मेरे लॉकर में कुछ गहने हैं उनको याद से ले लेना, पॉलिसी के कुछ कागज भी हैं....
मेरे कपड़े और मेरी फ़ोटो न हटाना कमरे से न ही मेरी डायरी..... मैं उन्हीं में ज़िन्दा रहूँगी।
हाँ मेरे जाने के बाद
अपने फ़ेवरेट कलर ब्लू से कमरे को कलर करवा लेना, चादर भी पर्दे भी सब उसी कलर का ले लेना,,,
और अगर कोई मुझसे ज़ियादह अच्छी मिले तो शादी ज़रूर कर लेना उससे ढ़ेर सारा प्यार भी करना पर मुझे अपने दिल के कोने में कहीं न कहीं बचा के ज़रूर रखना.....कहते कहते अनन्या और अजय दोनों फ़फ़क के रो पड़े....।
डॉक्टर ने फाइनली रिपोर्ट भी दे दी हाथ में 'कैंसर लास्ट स्टेज़' था अनन्या को।

अथाह मुहब्बत के बावजूद अजय सिर्फ़ बेबस, लाचार, आँखों मे आँसुओं सागर लिए खड़ा अजय भी शायद करोडों लोंगों के शहर में ख़ुद को अकेला महसूस कर रहा था..... और दिल से एक आवाज़ आ रही थी कि ''यहाँ अब और बचा क्या है,, ये शरीर है बस इसमें से ज़िन्दगी तो कहीं दूर कहीं बहुत दूर जा रही है.....

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   अश्विनी यादव

रविवार, 9 दिसंबर 2018

सब पहले जैसा है

सुबह वैसी ही हुई है
जैसे पहले भी होती आई है
आज भी उसी कप में चाय मिली
वही अख़बार, चहल- पहल
सब के सब एक जैसे थे
बस बदला था कुछ तो
मेरे अंदर का आदमी
मेरे दिल के अंदर की जगह
ये वो जगह है
जहाँ मुहब्बत, वफ़ा, ईमानदारी,
विश्वास, कामना और करुणा
रखने की तिजोरी बनी थी
लेकिन धोके नाम के डाकू ने
डाका डाल दिया
अब वहाँ सिर्फ़ और सिर्फ़
खालीपन है,
जहाँ सब एकदम वीरान है,
और कुछ नहीं बदला
सब पहले जैसा ही है
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     अश्विनी यादव

रविवार, 21 अक्टूबर 2018

मुहब्बत हासिल नही की जाती

हासिल करने के नाम पर सिर्फ़ ज़िस्म किया जा सकता है, रूह मुहब्बत में पाई जाती है। और मुहब्बत वो है जिसमें अपने महबूब की मात्र एक झलक पाने के लिए लाख जतन करने को मजबूर कर दे। उसका दीदार आपके दिल को तर कर दे.....वो है मुहब्बत।

     लोग कहते हैं कि ये सब तकियानूसी बातें हैं हक़ीक़त में इन सब से राब्ता होना मुश्किल है...लेकिन जाने क्यूँ आज़ भी मुझे ऐसी आशिकी पसन्द है, और मेरा विश्वास है।   काफ़ी हद तक मैंने लोंगों को देखा है कि "दो ज़िस्म अपनी आग देते हुए एक दूसरे को बर्फ़ कर देते हैं,, बस कुछ दिन बाद उन चलते फिरते दिलों की जगह कोई बुत ले लेता है क्योंकि वो दोनों एक दूसरे को छोड़ आगे बढ़ जाते हैं......
   लेकिन मैं उन दिलों में से हूँ जो बुत तो बनते हैं लेकिन उस संगदिल के इंतजार में, जिस जगह पर उसने छोड़ दिया था।  ज़िस्म तो उसकी रज़ामन्दी पर इजहार-ए-इश्क मात्र होता है, वाक़ई में अपने हमकदम को महसूस करना हो तो ज़िस्म से पहले रूह तक उतरने की कोशिश होनी चाहिए...।
उसकी बोलती आँखों से दर्द, चेहरे के खिलेपन से ख़ुशी, और ख़ामुशी से उलझन को महसूस करना, ख़ुद बेपरवाह होते हुए भी उसका ख़याल रखना ही मुहब्बत है......।
वो आपकी विस्मृता होकर भी आपके साथ रहेगी, आपको याद रहेगी।

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    अश्विनी यादव

रविवार, 7 अक्टूबर 2018

फ़िराक़-ए-गम

जा रही हो....रुक जाओ न प्लीज़ प्लीज़।

वो जा रही है मेरी दुनिया से दूर बहुत दूर , सब कोशिश कर चुका हूँ उसको रोकने की,,,,,, पर लगता है शायद वो ख़ुद भी नहीं रुकना चाहती है
आज ऐसा लग रहा है मेरा सब कुछ कहीं छूट जा रहा है जिसे मैं पाना चाहता हूँ लेकिन मेरे होंठ चुपचाप बस ख़ुद में घुटे जा रहें हैं।
   मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि उसके जाने के बाद मेरी दुनिया में रंग के नाम पर सिर्फ शायद काला रंग और एहसास के नाम पर उदासी ही बचेगी.....।
    रोज सुबह लालिमा लिए आएगी, शाम भी हसीन होगी सबकी होगी लेकिन मेरी जिंदगी में तुम्हारी मुहब्बत न होगी तो सुबह भी काली ही होगी मेरी।
   मुझे लग रहा है किसी बड़े रेगिस्तान में हूँ जिसमे सबसे ज्यादा जरूरत पानी की, छाँव की महसूस हो रही है और पानी तुम्हारी मुहब्बत है छाँव तुम्हारा मेरे साथ होना ।
काश ! तुम मुझे समझ पाती...... और बस किसी भी बहाने से रुक जाती।

चुपचाप जा रही हो मेरी जाना,
कम से कम एक दफ़ा झगड़ लेती,
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   अश्विनी यादव