कुल पेज दृश्य

mei aarzoo लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
mei aarzoo लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 25 मई 2019

ज़िन्दगी

सुनो अजय तुम्हारा साथ बहुत अच्छा है, तुम सबका ख़याल रखने में अपना ख़याल रखना भूल जाते हो. लेकिन ये बार बार चाय पीने वाली आदत तुम्हें छोड़नी पड़ेगी। अभी डॉक्टर ने तुम्हें मना किया था न और मीठा भी कम दो वरना शुगर की शिकायत हो जाएगी.... मेरे लॉकर में कुछ गहने हैं उनको याद से ले लेना, पॉलिसी के कुछ कागज भी हैं....
मेरे कपड़े और मेरी फ़ोटो न हटाना कमरे से न ही मेरी डायरी..... मैं उन्हीं में ज़िन्दा रहूँगी।
हाँ मेरे जाने के बाद
अपने फ़ेवरेट कलर ब्लू से कमरे को कलर करवा लेना, चादर भी पर्दे भी सब उसी कलर का ले लेना,,,
और अगर कोई मुझसे ज़ियादह अच्छी मिले तो शादी ज़रूर कर लेना उससे ढ़ेर सारा प्यार भी करना पर मुझे अपने दिल के कोने में कहीं न कहीं बचा के ज़रूर रखना.....कहते कहते अनन्या और अजय दोनों फ़फ़क के रो पड़े....।
डॉक्टर ने फाइनली रिपोर्ट भी दे दी हाथ में 'कैंसर लास्ट स्टेज़' था अनन्या को।

अथाह मुहब्बत के बावजूद अजय सिर्फ़ बेबस, लाचार, आँखों मे आँसुओं सागर लिए खड़ा अजय भी शायद करोडों लोंगों के शहर में ख़ुद को अकेला महसूस कर रहा था..... और दिल से एक आवाज़ आ रही थी कि ''यहाँ अब और बचा क्या है,, ये शरीर है बस इसमें से ज़िन्दगी तो कहीं दूर कहीं बहुत दूर जा रही है.....

____________________
   अश्विनी यादव

बुधवार, 2 मई 2018

पुनीत सिंह :- शख्सियत (मेरे अपनों में से)

          हम भाई हम अच्छे हैं, आप अपना बताइए..?? इन शब्दों से शुरुआत होती है.... कभी प्यार से 'सर', भाई, भैया, नाम.....यार जो जी में आये से सम्बोधित करता हूँ आपको।
       आइये मिलवाते हैं पेशे से पत्रकार हंसमुख और फ़िक्रमंद रहने वाले अपने भाई       पुनीत सिंह 'प्रियम' जी से....।
          बात उन दिनों की है जब हम घर पर यक्सर भी मिलते रहते थे माने हाल-चाल लेने को ही। आप कह सकते है हम 'लंगोटिया यार' हैं हलांकि हमने बदल के कभी पहनी नहीं है आज तक। हम दोनों लोग पड़ोसी हैं, और हमारे रिश्ते आज पानी+दूध की तरह हैं जिसे आजकल का समाजिक लैक्टोमीटर नही माप सकता है।

             खैर छोड़िये ये सब बातें कुछ जानते है पुनीत भाई के बारे में____
           बनारस, फ़ैजाबाद, इलाहबाद में इंटरमीडियट तक की पढाई पूरी हुई.....चूँकि पिता जी पुलिस में थे इस कारण तबादलों के साथ स्कूल भी बदलते रहे।
         आज से लगभग 7 साल पहले आपके पिता जी ड्यूटी पर कुछ बदमाशों से भिड़ंत में घायल हो गये और बहुत जिम्मेदारियों का भार देते हुए दुनिया से रुखसत हो लिए..... इतनी कम उम्र का लड़का एक छोटी बहन और माँ.... अभी दुनिया को करीब से देखा भी नही था, मस्ती भरे दिन चल रहे थे हाईस्कूल पूरा हुआ था शायद......दुनियादारी की कोई ख़बर नही सम्हालने को, मार्गदर्शन को घर के बुजुर्गों का साथ नहीं.........।
          और इन्हीं परिस्थितियों ने पुनीत को इतना समझदार और क़ाबिल बनने को प्रोत्साहित किया.....हम और हमारा परिवार सदा से ही साथ रहा है हर क्षण में।
          आज बहन IIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है और पुनीत भाई IIMC से पढ़ाई पूरी करके एक प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल  #बोलता_हिंदुस्तान  में पत्रकार #बोलता_यूपी के एडिटर इन चीफ हैं। निष्पक्ष और बेख़ौफ़ पत्रकारिता में आज एक नाम आपका भी है....जिससे मैं ख़ुद को गौरान्वित महसूस करता हूँ। मेरा हमेशा साथ देने वाले भाई बहुत प्यार आपको।
        दुआ है आप हमेशा मेरे साथ रहो।

             ― अश्विनी यादव

रविवार, 7 जनवरी 2018

एक छाता और थोड़ी बारिश

शुरू कहाँ से करूँ
मैं ये छोटी सी कहानी
वो-मैं साथ ही थे
और थोड़ी सी जवानी,
बस मैं तकता रहा
आ जाये अब आ जाये
थोड़ी सी बारिश
औ क़िस्मत जगा जाये,
आसमां में घटाएं
जरा सा ही रहम कर दें
कुछ बूंदे बरसे औ
हमें इक छाते में कर दें,
बस इत्ती सी ही
इक ही तो ख़्वाहिश है
आज वो पास है
यूँ फुंकी की नुमाइश है,
जरा बरस देगा
तेरा क्या चला जाएगा
सोच इस लम्हें में
सदियों आराम आएगा,
      
      ― अश्विनी यादव​​