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बुधवार, 2 मई 2018

पुनीत सिंह :- शख्सियत (मेरे अपनों में से)

          हम भाई हम अच्छे हैं, आप अपना बताइए..?? इन शब्दों से शुरुआत होती है.... कभी प्यार से 'सर', भाई, भैया, नाम.....यार जो जी में आये से सम्बोधित करता हूँ आपको।
       आइये मिलवाते हैं पेशे से पत्रकार हंसमुख और फ़िक्रमंद रहने वाले अपने भाई       पुनीत सिंह 'प्रियम' जी से....।
          बात उन दिनों की है जब हम घर पर यक्सर भी मिलते रहते थे माने हाल-चाल लेने को ही। आप कह सकते है हम 'लंगोटिया यार' हैं हलांकि हमने बदल के कभी पहनी नहीं है आज तक। हम दोनों लोग पड़ोसी हैं, और हमारे रिश्ते आज पानी+दूध की तरह हैं जिसे आजकल का समाजिक लैक्टोमीटर नही माप सकता है।

             खैर छोड़िये ये सब बातें कुछ जानते है पुनीत भाई के बारे में____
           बनारस, फ़ैजाबाद, इलाहबाद में इंटरमीडियट तक की पढाई पूरी हुई.....चूँकि पिता जी पुलिस में थे इस कारण तबादलों के साथ स्कूल भी बदलते रहे।
         आज से लगभग 7 साल पहले आपके पिता जी ड्यूटी पर कुछ बदमाशों से भिड़ंत में घायल हो गये और बहुत जिम्मेदारियों का भार देते हुए दुनिया से रुखसत हो लिए..... इतनी कम उम्र का लड़का एक छोटी बहन और माँ.... अभी दुनिया को करीब से देखा भी नही था, मस्ती भरे दिन चल रहे थे हाईस्कूल पूरा हुआ था शायद......दुनियादारी की कोई ख़बर नही सम्हालने को, मार्गदर्शन को घर के बुजुर्गों का साथ नहीं.........।
          और इन्हीं परिस्थितियों ने पुनीत को इतना समझदार और क़ाबिल बनने को प्रोत्साहित किया.....हम और हमारा परिवार सदा से ही साथ रहा है हर क्षण में।
          आज बहन IIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है और पुनीत भाई IIMC से पढ़ाई पूरी करके एक प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल  #बोलता_हिंदुस्तान  में पत्रकार #बोलता_यूपी के एडिटर इन चीफ हैं। निष्पक्ष और बेख़ौफ़ पत्रकारिता में आज एक नाम आपका भी है....जिससे मैं ख़ुद को गौरान्वित महसूस करता हूँ। मेरा हमेशा साथ देने वाले भाई बहुत प्यार आपको।
        दुआ है आप हमेशा मेरे साथ रहो।

             ― अश्विनी यादव

रविवार, 5 नवंबर 2017

शख्सियत (आंनद सागर पाण्डेय 'अनन्य देवरिया')

नमस्कार,
     हर बार की तरह फिर मैं हाजिर हूं एक नई शख्सियत, जो कि मेरे अपनों में से एक हैं, के साथ में।
बेहद शालीन और सुलझे हुए पेशे से इंजीनियर तथा अद्भुत कलमकार........ हजारों लाखों दिलों पर अपनी गजल और शायरी से राज करने वाले एक बेहतरीन लेखक, कवि, इंजीनियर, भाई, दोस्त और इन सभी के साथ एक अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी.....
श्री आनंद सागर पांडेय 'अनन्य देवरिया' जी
[संस्थापक, राष्ट्रीय साहित्य चेतना मंच]
[उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय साहित्य उत्थान परिषद]
       से रूबरू करवाता हूँ।
आपकीपढ़ाई की सारिणी जरा सा लम्बी है, फिर भी इतना काफी है बताने के लिए की अभी सीनियर प्रोजेक्ट इंजीनियर के तौर पर एक बड़ी कम्पनी मे कार्यरत है। साथ साथ अपने ओजस्वी कलम की ताकत से साहित्य की सेवा में रमे रहते है।
      
बहुत कम उम्र में ही भैया अनन्य जी कई किताबें पब्लिस हो चुकी है। 2011 में एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक मंच की स्थापना के साथ साथ आज एक अन्य साहित्यिक परिषद में बतौर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी के साथ साहित्य के प्रति प्रेम के दायित्व का निर्वाह कर रहे हैं। इन सबके अतिरिक्त वीडियो म्यूजिक एलबम के प्रोजेक्ट और नए poets के लिए Mic. Session वाले स्टूडियो पर भी काम कर रहें हैं......जो कि जल्द ही सामने होगा आप सभी के।
           अब आते है हम अपने और अनन्य भैया से मुलाकात और रिश्ते पर... तो....
मैं अक्सर पढ़ता रहता था इन्हें, क्योंकि मुझे इतनी ओजस्वी कवितायें और दिल को छू जाने वाली गजलें और कहीं मिलती भी नही थीं किसी अन्य के वाल पर, सो मैं आपका बहुत बड़ा प्रशंसक बन चुका था....फिर कमेंट और कभी कभी हाल चाल होता रहता था..
बारिश का मौसम था, मैंने मोबाईल नम्बर लिया भैया से और बात जब कर रहा था तभी अचानक बारिश शुरू हो गयी और मेरा फोन भीग गया..... खैर बात हुई ।
फिर हर जरूरत पर अक्सर सलाह के लिए, हाल खबर के लिए बात होती रहती है, हाँ एक चीज है कि मेरे राजनीतिक पोस्ट से कभी कभी आहत भी हो जाते है,,,,,लेकिन उन्हें पता है कि यदि मैंने कोई बात कही है तो उसके पीछे कोई न कोई कारण अवश्य है...बाकी जब भी कोई नई बात होती है हमसे जरूर शेयर करते ही रहते हैं। अभी हाल में ही मुझे उस सम्मानित साहित्यिक मंच का प्रदेश महासचिव नामित किया है जिसके आप संस्थापक हैं, मुझे सच में कभी नही पता था कि एक दिन इस सम्मानित ओहदे का हकदार भी मैं होऊंगा। इसके लिए मैं पुनः आपका और राष्ट्रीय अध्यक्ष  जी आभार प्रकट करता हूँ।
.......लेकिन जब भी मैं पूछता हूँ कि अब "आगे की क्या प्लानिंग हैं...??? तो पहले आप हंसते है फिर....
फ़िलहाल तो अभी इन्ही सब पर काम कर रहा हूँ जिसपे फोकस है, हाँ यदि इसके साथ मे कोई बढ़िया प्रोजेक्ट समझ आता है या दिखाई पड़ता है तो उसे हम जरूर आगे बढाएंगें.......।।
    मैं अश्विनी यादव, आपके ज्वलंत मुद्दों पर सच की आग लिखने वाली कलम और आपके उज्ज्वलम भविष्य की कामना करते हुए.....इस बात का धन्यवाद करता हूँ कि मुझे एक बड़े भाई, परम् मित्र, बेहतरीन कवि मार्गदर्शक और अद्वितीय व्यक्तित्व के रूप में आप का साथ मिला।

         ― अश्विनी यादव

रविवार, 1 अक्टूबर 2017

शख्सियत (मयंक यादव)

नमस्कार,
         एक बार फिर से शख्सियत के नए अंक में मैं आपका स्वागत करता हूं और आज 'मेरे अपनों' में से एक शख्सियत से आप लोगों को रूबरू कराता हूं...
      बेहद शांत, सौम्य, सरल, मृदुभाषी, होने के साथ साथ एक उम्दा लेखक, कवि, फोटोग्राफर,,,,,,और क्या क्या गिनाऊँ....बेहतरीन Writer, Poet, Photographer, Leader, Socialist, Player, Singer, Actor, Dancer, Teacher,  Brother, Friend,,,,,,होने के साथ मे एक अधिवक्ता, और भावी IAS भी है।
.......बिना किसी सस्पेंस को रखते हुए मैं आपको बता दूं कि मै मयंक यादव जी की बात कर रहा हूँ...
    मयंक भैया की पढ़ाई इंटरमीडिएट तक लखनऊ में ही हुई उसके बाद इन्होंने इलाहाबाद का रुख किया इलाहाबाद विश्वविद्यालय से b.a. पूरा किया उसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी पूरा किया लखनऊ विश्वविद्यालय से छात्र नेता रहते हुए कई आंदोलन में नेतृत्व किया था कई कल्चरल प्रोग्राम करवाए थे इन सभी के साथ साथ में विधि प्रतिनिधि पद पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी थी और आज भैया जी दिल्ली में सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
हमे कोई शक नही की जल्द ही आप आईएएस भी होंगें।

              अब आइए आपको बताते हैं कुछ दिलचस्प बातों से..... मैं ईलाहाबाद से लखनऊ भैया के पास नया नया आया था,
घर की बेल बजी मैं गेट खोला तो देखा कि एकदम नई रेसिंग बाइक के साथ स्मार्ट से, बेहतरीन पर्सनालिटी वाले  एक भाई साहब थे, जो चंद्रेश भैया जी से मिलने आये थे, अंदर आते हैं वह और भैया से कुछ देर बाद होती है मैं चाय बनाने  लगता हूं, तब पता चलता है कि उनका नाम मयंक यादव है, जो कि भैया के जूनियर भी है....छात्र नेता भी है।
     उस दिन जरा सी बात हुई थी हमारी ने पूछा कि क्या कर रहे हो हमने बताया कि इंजीनियरिंग चल रही है, फिर एक दो बार मुलाकात हुई....लेकिन सम्बन्ध ठीक से नही बने थे मेरे....पर फेसबुक पर कभी कभी बात हुआ करती थी.... और मैं बनारस से लखनऊ आया था तब मयंक भैया से एक बेहतरीन मुलाकात हुई जिसके बाद हमारे संबंध काफी ज्यादा अच्छे हो गए थे और फोन पर वैसे भी बातचीत होती रहती थी समय सलाह अक्सर लेता रहता था मैंने बचपन में एक बार के बाद  हाल में कभी मूवी नहीं देखी थी, सो मयंक भैया के साथ पहली बार और मैं मूवी देखने गया...। भैया जब भी आते है तो कहीं न कहीं बाहर निकलते ही है हम लोग। मयंक भैया आज भी मेरा अनुज के जैसे ख़्याल रखते हैं......मुझे इस बात से अत्यंत प्रसन्नता है कि मुझे मेरे बड़े भाइयों द्वारा हमेशा से मार्गदर्शन, प्यार और सहयोग मिला है....जिसके लिए मैं ईश्वर का सदैव ऋणी रहूंगा.........।
      अब आते है हम....मयंक यादव जी के भविष्य के सोच पर, तो.....
पहला लक्ष्य है आईएएस क्वालीफाई करके जिलाधिकारी बनना, उसके बाद शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक अधिकार के लिए सदैव तत्पर रहना।
प्राथमिक विद्यालयों की दशा सुधारना जिससे देश के भविष्य की दिशा सही निर्धारित हो। उचित रोजगार के लिए....अपने जिले में ही कुछ लघु उद्योग की व्यवस्था करवाना। जिन चीजों से गरीब तपका दूर रहा है उन सभी प्रकार की कौशलताओ को। नए आयाम स्थापित करने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना। बाल विकास, महिला सशक्तिकरण, अनाथालयों,वृद्धाश्रमों, और किसानों की हित आदि के लिए समय समय पर नई  योजनाओं के लिए प्रतिबद्ध रहना.....
सर्वाधिक महत्वपूर्ण है साक्षरता, जिसके लिए पूरी कोशिश होगी कि जिले के हर गांव का प्रत्येक सदस्य साक्षर हो।
.........मैं अश्विनी, अनुज के तौर पर ये कामना करता हूँ कि आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो, तभी हम सभी को एक अच्छा अधिकारी और तम को हरने वाला सूरज मिलेगा।

              ― अश्विनी यादव