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गुरुवार, 25 जनवरी 2018

भूमि को पहले जन्मदिवस पर बधाई

मेरी जान तुम्हें जन्मदिवस पर
ढेरों ढेर बधाई है,
घर-आंगन में खुशियां गूँज रही
जब से तू आई है,

मेरी जान तुम्हें जन्मदिवस......

बंजर बंजर से हम सहरा में तू
कोपल सी आई है,
घर के मुरझाये बागों में कूकने
कोयल सी आई है,

सुनो जरा 'भूमि' बिटिया रानी
बीते एक बरस से,
मुझ शज़र पर तू सावन सी
हर दिन छाई है,

मेरी जान तुम्हें जन्मदिवस पर
ढेरों ढेर बधाई है.......

.......प्यारी भतीजी भूमि को पहले जन्मदिवस के अति शुभावसर पर अनन्त बार शुभकामनाएं.....आकाश भर आशीर्वाद....मेरी दुआएं मेरी बच्ची तुम्हारे साथ हैं.....

        ― अश्विनी यादव

सोमवार, 20 नवंबर 2017

आज बाज़ार गये थे

चटपटे चाट वाले के
तवे  की  खनखन,
बगल गुब्बारे वाले के
घुनघुनों की छनछन,
चूड़ी वाली चाची के
शीशों की चमक,
यादव जी के  घी के
लड्डूवों की महक,
सब खरीद लायें हैं
हम बाज़ार गये थे।।

सीटियों की सी-सी
गाड़ियों का शोर,
बन्दर की  खीं-खीं
नाचता इक मोर,
डमरू की डम-डम
लकड़ी का सांप,
चलते रहे थम-थम
भठ्ठियों की भाप,
सब बटोर लाये हैं,
आज बाज़ार गये थे।।

चमकता हुआ ताज
एक परी की छड़ी,
उड़ने वाला जहाज
एक छोटी सी घड़ी,
पूरा झोला भर खुशी
होंठों की मुस्कान,
तैरते हवा पर हंसी
झूले  की  उड़ान,
सब घर लायें हैं,
आज बाज़ार गये थे।।

     प्यारी भतीजी भूमि के लिए ये दूसरी कविता ''आज बाज़ार गए थे''......
     
       ― अश्विनी यादव

रविवार, 1 अक्टूबर 2017

शख्सियत (मयंक यादव)

नमस्कार,
         एक बार फिर से शख्सियत के नए अंक में मैं आपका स्वागत करता हूं और आज 'मेरे अपनों' में से एक शख्सियत से आप लोगों को रूबरू कराता हूं...
      बेहद शांत, सौम्य, सरल, मृदुभाषी, होने के साथ साथ एक उम्दा लेखक, कवि, फोटोग्राफर,,,,,,और क्या क्या गिनाऊँ....बेहतरीन Writer, Poet, Photographer, Leader, Socialist, Player, Singer, Actor, Dancer, Teacher,  Brother, Friend,,,,,,होने के साथ मे एक अधिवक्ता, और भावी IAS भी है।
.......बिना किसी सस्पेंस को रखते हुए मैं आपको बता दूं कि मै मयंक यादव जी की बात कर रहा हूँ...
    मयंक भैया की पढ़ाई इंटरमीडिएट तक लखनऊ में ही हुई उसके बाद इन्होंने इलाहाबाद का रुख किया इलाहाबाद विश्वविद्यालय से b.a. पूरा किया उसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी पूरा किया लखनऊ विश्वविद्यालय से छात्र नेता रहते हुए कई आंदोलन में नेतृत्व किया था कई कल्चरल प्रोग्राम करवाए थे इन सभी के साथ साथ में विधि प्रतिनिधि पद पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी थी और आज भैया जी दिल्ली में सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
हमे कोई शक नही की जल्द ही आप आईएएस भी होंगें।

              अब आइए आपको बताते हैं कुछ दिलचस्प बातों से..... मैं ईलाहाबाद से लखनऊ भैया के पास नया नया आया था,
घर की बेल बजी मैं गेट खोला तो देखा कि एकदम नई रेसिंग बाइक के साथ स्मार्ट से, बेहतरीन पर्सनालिटी वाले  एक भाई साहब थे, जो चंद्रेश भैया जी से मिलने आये थे, अंदर आते हैं वह और भैया से कुछ देर बाद होती है मैं चाय बनाने  लगता हूं, तब पता चलता है कि उनका नाम मयंक यादव है, जो कि भैया के जूनियर भी है....छात्र नेता भी है।
     उस दिन जरा सी बात हुई थी हमारी ने पूछा कि क्या कर रहे हो हमने बताया कि इंजीनियरिंग चल रही है, फिर एक दो बार मुलाकात हुई....लेकिन सम्बन्ध ठीक से नही बने थे मेरे....पर फेसबुक पर कभी कभी बात हुआ करती थी.... और मैं बनारस से लखनऊ आया था तब मयंक भैया से एक बेहतरीन मुलाकात हुई जिसके बाद हमारे संबंध काफी ज्यादा अच्छे हो गए थे और फोन पर वैसे भी बातचीत होती रहती थी समय सलाह अक्सर लेता रहता था मैंने बचपन में एक बार के बाद  हाल में कभी मूवी नहीं देखी थी, सो मयंक भैया के साथ पहली बार और मैं मूवी देखने गया...। भैया जब भी आते है तो कहीं न कहीं बाहर निकलते ही है हम लोग। मयंक भैया आज भी मेरा अनुज के जैसे ख़्याल रखते हैं......मुझे इस बात से अत्यंत प्रसन्नता है कि मुझे मेरे बड़े भाइयों द्वारा हमेशा से मार्गदर्शन, प्यार और सहयोग मिला है....जिसके लिए मैं ईश्वर का सदैव ऋणी रहूंगा.........।
      अब आते है हम....मयंक यादव जी के भविष्य के सोच पर, तो.....
पहला लक्ष्य है आईएएस क्वालीफाई करके जिलाधिकारी बनना, उसके बाद शिक्षा, सुरक्षा और सामाजिक अधिकार के लिए सदैव तत्पर रहना।
प्राथमिक विद्यालयों की दशा सुधारना जिससे देश के भविष्य की दिशा सही निर्धारित हो। उचित रोजगार के लिए....अपने जिले में ही कुछ लघु उद्योग की व्यवस्था करवाना। जिन चीजों से गरीब तपका दूर रहा है उन सभी प्रकार की कौशलताओ को। नए आयाम स्थापित करने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देना। बाल विकास, महिला सशक्तिकरण, अनाथालयों,वृद्धाश्रमों, और किसानों की हित आदि के लिए समय समय पर नई  योजनाओं के लिए प्रतिबद्ध रहना.....
सर्वाधिक महत्वपूर्ण है साक्षरता, जिसके लिए पूरी कोशिश होगी कि जिले के हर गांव का प्रत्येक सदस्य साक्षर हो।
.........मैं अश्विनी, अनुज के तौर पर ये कामना करता हूँ कि आपकी सभी इच्छाएं पूरी हो, तभी हम सभी को एक अच्छा अधिकारी और तम को हरने वाला सूरज मिलेगा।

              ― अश्विनी यादव

सोमवार, 18 सितंबर 2017

शख्सियत 3 ( चंद्रेश यादव )


नमस्कार,
मैं शख्सियत के नए अंक मे आपकी मुलाकात फिर से एक नई शख्सियत से करवा रहा हूं, जिन्हें मैं अपने बचपन से, शायद उनके बारे में लगभग सब कुछ या बहुत कुछ जानता हूं आप मेरे लिए हमेशा प्रेरणा स्रोत रहे हैं हमारा मार्गदर्शन करते रहे हैं और सही गलत की शिक्षा के साथ-साथ मुझे हमेशा लिखते रहना और हक की आवाज बुलंद करने के लिए प्रेरित करते रहें, जी हां मैं बात कर रहा हूं अपने अग्रज श्री चंद्रेश यादव जी की।
.......हालांकि मेरी हैसियत नही है इतनी की मेरे द्वारा आपका परिचय कराऊँ.....फिर भी.... ये हिमाकत जरूरी थी।
........ आप पेशे से अधिवक्ता है, समाजवादी पार्टी के जमीनी नेता है, और एक नेक दिल के मालिक है... इलाहाबाद से 12 वीं के बाद से लखनऊ यूनिवर्सिटी llb और एल एल एम पूरा किया । आप का शुरू से ही  छात्र हित हो  या अन्य कोई मुद्दा हो आप हमेशा संघर्षशील रहे हैं  जिसकी बदौलत आपने 2004 में लखनऊ यूनिवर्सिटी में कैंपस से छात्र नेतृत्व करते हुए विधि प्रतिनिधि का चुनाव जीता, इसके उपरांत 2005 2006 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी रहें..... 2011 में प्रतापगढ़ से आपने जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जिस में मामूली अंतर से हार गए, लेकिन आपके जुझारूपन को देखते हुए घर का एक अनुज अनुराग यादव बाली छात्र संगठन हित में आगे आया और आपके मार्गदर्शन में इविवि से उपमंत्री का चुनाव लड़ा, अब आपके ही मार्गदर्शन में ही हमारी भाभी जी समर्थक भावना यादव जानकीपुरम, लखनऊ से पार्षद प्रत्याशी भी है।
खैर ये सब तो चलता ही रहेगा, अब मैं भैया जी की कुछ दिलचस्प बातों से रूबरू कराता हूं मित्रों..
मैं बचपन में एक बात हमेशा दुखी होता था कि भैया मुझे हर सुबह ढेर सारे सिक्के रहते थे और मैं दिन भर उनके साथ खेलता रहता था शाम को जो सोया था था वह मेरी जेब से सारे सिक्के निकाल लेते थे फिर अगले दिन वह मुझे देते थे और यह कहते थे कि तुमने सारे सिक्के को दिए अब लोग फिर से दे रहा हूं और मैं दिन भर यही सोचता रहा है बार बार मुझे सिक्के दे रहे हैं और मैं गंदा हूं की खो दे रहा हूं। अब आता हूं दूसरी बात पर तो अभी तक यहां रहेंगे भैया का जब क्रिकेट खेलने का मन होता है तो हम लोग के साथ जबरदस्ती खेलते हैं क्रिकेट और सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें पहले बैटिंग और पहले बोलिंग चाहिए, अगर हम उनके साथ में न खेले तो चिल्लाने के लिए कोई न कोई बहाना ढूंढ लेते हैं।
इन सब से परे एक दूसरा लोगों का यह है कि उन्हें कुत्तों से बहुत प्यार है वर्तमान समय में उनके पास तीन है छोटू टाइगर, जेनी.... और हम भाइयों के लिए अथाह प्रेम, पूरे परिवार का ख्याल रखना... परंतु इनकी भूल जाने की आदत सबसे गंदी है पर सबसे अच्छा यह है कोई भी मिलता है आपसे तो मिलनसार व्यक्तित्व की वजह से उसे कभी यह फील नहीं होता है कि वह आपसे पहली बार मिल रहा है।
अपने हिसाब और हैसियत के अनुसार अनगिनत लोगों की मदद करते हुए आज इस मुकाम तक पहुंचे है,,,,,आपके द्वारा कभी किसी के साथ कोई धोखेबाजी न करना ही मैंने सरखों पर आपको रखा है।
आपसे सबको सिर्फ एक बात की शिकायत है कि आप फोन नही उठाते है, कहीं पहुंचने के लिए देर कर देते हैं, व्यस्तता में कई काम भूल जाते है,
मैं आपको जन प्रतिनिधि के रूप में देखना चाहता हूं, उम्मीद है कि एक दिन ये हकीकत होगा और जल्द ही होगा।
आज मुझे इतने ढेर सारे लोग जानते है, और ध्यान रखते है इन सबके लिए आपका ढेरो योगदान है।
"पिता की अनुपस्थिति में बड़ा भाई सारी जिम्मेदारी निभाता है,, ये सिर्फ सुना ही नही हम देख भी रहे हैं...
घर से दूरी कभी महसूस नही होती,,,,
धन्यवाद अग्रज श्री चंद्रेश यादव जी

                     ― अश्विनी यादव