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सोमवार, 19 अगस्त 2019

जन्मोत्सव 'अफराज़ खान'

यहाँ -वहाँ सब तरफ
अख़बार से लेकर
टीवी के ख़बरों तक
बस नफरत ही बँट रही है
आजकल नफरत का कारोबार
बहुत बढ़ गया है
शायद इसकी मांग भी है
ख़ून के छीटे ऐसे
गहरे सुर्ख लाल
गाढे से हैं, जो
मिटा सकते हैं किसी भी
उजाले को... लेकिन
इस तिमिर में मुझे
एक चमकती हुई चीज दिखी
इससे रौशनी आ रही है
जिसकी साँसे चल रही थी
यानी एक दीपक जल रहा था
"मुहब्बत की हिफाज़त,,
कर्म में है इसके
शायद कुछ एक खुशियाँ
मयस्सर न हुई हैं
या यूँ कहूँ वो ख़ुशी
नाक़ाबिल थी इसके....
आज भी आँधियों से लड़ता है
और मुहब्बत की हिफाज़त
ज़िन्दादिली से करता है
ये यार है, भाई है, आवाज है
इस मुहब्बत का नाम 'अफराज़' है।

जन्मोत्सव की बहुत बहुत शुभकामनाएं, बड़े भाई हो, दोस्त हो बस इतना ही कॉफ़ी, चाय, दारू, कोल्डड्रिंक सब है मेरे लिये,,,, भाई तुम्हारी सलामती के लिए बहुत दुआएँ,,,, भगवान भोलेनाथ की कृपा सदैव बनी रहे और ऐसे ही पूरे जगत भर में मुहब्बत बाँटते रहो जान। बाक़ी तो आपकी हर क़ामयाबी मेरी क़ामयाबी है भाई।

एक सबसे ख़ास बात "मैं नल्ला हूँ, कमाता धमाता नही हूँ तो आप अभी से पैसे जमा करके रखो क्योंकि दिल्ली आऊँगा तो स्टेशन से उतरने के बाद एक फूटी कौड़ी नही ख़र्च करूँगा मैं सब आपको ही करना पड़ेगा याद रखियो गुरु,, और हाँ अपने शादी के अपने ड्रेस के साथ मेरी भी ख़रीदकर रख लेना भैय्ये....ये रिक्वेस्ट नही है बस बता रहा हूँ.....😊😊😊😊

बहुत दुआएँ यार भैया आप ख़ुश रहो सलामत रहो, बहुत मुहब्बत।
__________________
  अश्विनी यादव

बुधवार, 2 मई 2018

पुनीत सिंह :- शख्सियत (मेरे अपनों में से)

          हम भाई हम अच्छे हैं, आप अपना बताइए..?? इन शब्दों से शुरुआत होती है.... कभी प्यार से 'सर', भाई, भैया, नाम.....यार जो जी में आये से सम्बोधित करता हूँ आपको।
       आइये मिलवाते हैं पेशे से पत्रकार हंसमुख और फ़िक्रमंद रहने वाले अपने भाई       पुनीत सिंह 'प्रियम' जी से....।
          बात उन दिनों की है जब हम घर पर यक्सर भी मिलते रहते थे माने हाल-चाल लेने को ही। आप कह सकते है हम 'लंगोटिया यार' हैं हलांकि हमने बदल के कभी पहनी नहीं है आज तक। हम दोनों लोग पड़ोसी हैं, और हमारे रिश्ते आज पानी+दूध की तरह हैं जिसे आजकल का समाजिक लैक्टोमीटर नही माप सकता है।

             खैर छोड़िये ये सब बातें कुछ जानते है पुनीत भाई के बारे में____
           बनारस, फ़ैजाबाद, इलाहबाद में इंटरमीडियट तक की पढाई पूरी हुई.....चूँकि पिता जी पुलिस में थे इस कारण तबादलों के साथ स्कूल भी बदलते रहे।
         आज से लगभग 7 साल पहले आपके पिता जी ड्यूटी पर कुछ बदमाशों से भिड़ंत में घायल हो गये और बहुत जिम्मेदारियों का भार देते हुए दुनिया से रुखसत हो लिए..... इतनी कम उम्र का लड़का एक छोटी बहन और माँ.... अभी दुनिया को करीब से देखा भी नही था, मस्ती भरे दिन चल रहे थे हाईस्कूल पूरा हुआ था शायद......दुनियादारी की कोई ख़बर नही सम्हालने को, मार्गदर्शन को घर के बुजुर्गों का साथ नहीं.........।
          और इन्हीं परिस्थितियों ने पुनीत को इतना समझदार और क़ाबिल बनने को प्रोत्साहित किया.....हम और हमारा परिवार सदा से ही साथ रहा है हर क्षण में।
          आज बहन IIT से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही है और पुनीत भाई IIMC से पढ़ाई पूरी करके एक प्रतिष्ठित न्यूज पोर्टल  #बोलता_हिंदुस्तान  में पत्रकार #बोलता_यूपी के एडिटर इन चीफ हैं। निष्पक्ष और बेख़ौफ़ पत्रकारिता में आज एक नाम आपका भी है....जिससे मैं ख़ुद को गौरान्वित महसूस करता हूँ। मेरा हमेशा साथ देने वाले भाई बहुत प्यार आपको।
        दुआ है आप हमेशा मेरे साथ रहो।

             ― अश्विनी यादव