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सोमवार, 10 अप्रैल 2023

कृपया लड़कियों और लड़कों को धार्मिक द्वेष में आकर तंग न करें।

फोटो, वीडियो से परेशान करने वाले
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सबसे पहले तो हाथ जोड़कर🙏 रिक्वेस्ट है कि ये सब न करिये किसी की भी ज़िन्दगी दाँव पर लग जाती है आपके ट्वीट्स से... आप भी आदमख़ोर बन जाए रहे हो कहीं न कहीं। शेयर न करें ऐसे वीडियोज को।👇

तमाम वीडियोज, फोटोज के पोस्ट आ रहे हैं जिसमें मुसलमान पुरुष ये दिखा रहे हैं कि ये लड़की मुस्लिम है और लड़का हिन्दू है। कई बार तो लड़की का बुर्का तलक उठाकर फेस दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, लड़के के फेस के साथ गाड़ी का नम्बर और नम्बर से मिली पर्सनल डिटेल्स भी शेयर कर रहे हैं। कोई लड़का -लड़की मेट्रो में जा रहा है तू उन दोनों की फोटोज लेकर वायरल कर रहे हैं....

सब में भगवा ट्रैप, भगवा जिहाद और न जाने क्या क्या वाहियात चीज़ें हैशटैग में डाल रहे हैं। सबसे पहली बात तो किसी लड़की का चेहरा रिवील करना और थ्रेट देना, धमकी भरी बातें लिखना..  धर्म/मज़हब के चोले में उस लड़की और लड़के के प्रति पूरे समाज को भड़क।ना.. क्या ये सब अपर।ध की श्रेणी में नहीं आता है? आता है।
सबसे पहले तो ये तमाम अपरlधी घटिय।  म।नसिकता के लोग हमारे संविधान के अनुच्छेद 19 के ख़िलाफ़ जा रहे हैं। उसके बाद इन्हें धर्म के नाम पर ये सब काम करना शोभा देता है.?

अब तमाम टटपुँजिया लोग आकर ये कहेंगें कि फ़लाने नेता, ढिमका बाबा महोदय या कोई चुड़ैल चाची तो हमारे समाज के ख़िलाफ़ ये-वो बोलती है, गाली बकती है तो तुम क्यों नहीं बोलते हो..? तुम चुप क्यों रहते हो.?

तो प्रिय भाई बहन ये जान लो कि मैं सब पर बोलता हूँ और जिसमें सुधार की संभावना ही नहीं है उनको छोड़ दिया हूँ ऊपर वाले पर कि इनकी सज़ा तू ही तय कर ले। अब वो मैला खायेंगें गटर में उतर कर तो तुम काहे पीछे रहोगे.. तुम्हें भी खाने की ही चुल्ल मची है न।

अरे अगर किसी को ज़बरन परेशान करना, बुर्का उठाकर सरेआम बेइज़्ज़त करना, उसकी जान को ख़तरे में डालना सही लग रहा है तो वो किताब दिखाओ जिसमें ये जायज़ ठहराया गया है! न तो कोई धर्म और न ही कोई इंसानियत ये सब करने को कहती है।

सुधार लाइये, अगर कोई बालिग़ है तो आप उससे उसके अधिकार के ख़िलाफ़ मत जाइए, किसी के बाप मत बनने लगिये। अन्यथा सामने वाली पार्टी किसी दिन मज़बूत मिल गई न तो वहीं चौराहे पर लड़की और लड़का मिलकर चप्पलों से तुम्हारी ख़ातिरदारी भी कर देंगें... और हाँ फिर समझ आ जायेगा।

“देश संविधान से चलेगा” ये कहते हो न तो इस पर ख़ुद भी अमल करना सीखो।

         ~ अश्विनी यादव 

सोमवार, 20 मार्च 2017

लूट गये

राम नाम पे लूट ले गये
गाय पे हत्या जारी है,
दलितों को सब पीट गये
गंगा पूजन उधारी है,
खुद को राष्ट्रवादी कहते
सेना पे वोट बाजारी है,
अपने मर रहे रोज पर उन्हें
विदेशी जमीने प्यारी है,
दुःख नही झूठे सारे वादे थे
हाँ ये सरकार व्यापारी है,
मन्दिर मन्दिर हर बार किये,
पर समय न कभी जारी है,
गर मन्दिर बना तो भेद खत्म,
बस यहीं समस्या सारी है, 
समाजवाद का कल्पित चेहरा,
ठाना राम पार्क बनवाने का,
वोट खातिर धर्म युद्ध शुरू किये,
ये भूल  तुम्हारी  भारी है,
व्यापार इनके खून में बह रहा,
बह चुकी हिंदुत्वता सारी है, 
ये दलाल है उद्योगपतियों के,
सब पैसे वालों के दरबारी है।
         
       © ―अश्विनी यादव

सोमवार, 28 नवंबर 2016

आप तो उनसे भी आगे हो

"___खुद को सेवक और चौकीदारी कहने वाले एक कद्दावर नेता और उसके लगभग अंधे हो चुके समर्थकों को समर्पित ये पंक्तियाँ___,,
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
जनता भूखी थकी हुई और चहुं ओर हाहाकार है,
पगले भक्त चिल्ला रहे है की बागों में बहार है,
उन्हें जान के लाले पड गये जो हमारे जिम्मेदार है,
देश का मुंह बंद करो कह रहा फट्टू चौकीदार है,
सलीमा देखाई में नोट चले पर खा नही सकते है,
वो लाइन में खाए धक्के जो आ जा नही सकते है,
बुढ़िया रोये अपाहिज रोये भारत देश परेशान हुआ,
आधी रात मे तेरे नाटक से जन मानस हैरान हुआ,
ये जान लो जिस कारण से तुम्हे सरताज बनाया था,
कैसे उनको गर्त में फेंक तुम्हें सत्ताधीश बनाया था,
पर क्या कहें की तुमने उनको काफ़ी पीछे छोड़ दिया,
तानाशाही और घुमाई कर हम से नाता तोड़ दिया,
रोटी छीना, थाली छीना, मुँह में नोटिस ठूस दिया,
चादर छीन लिया हमसे बदले में ठिठुरती पूस दिया,
सुन ओ सनकी राजा अधिकारों का हनन किया तुमने,
आपातकाल स्थिति पैदा कर हमे शर्मसार किया तुमने,
तुमको लाया भूल हुई तुम गला दबाने पे तुल गये हो,
तुम मदमस्त हाथी से सत्ता नशे में सब भूल गये हो,
है कसम इस बार तुम्हें जनता औकात दिखा देगी,
जैसे तुमको बिठाया था वैसे ही तुमको गिरा देगी,
नोट बंदी सही किया पर तरीका जनहित में न था,
तुम्हें गरीबी समझ होगी सोच लेना उचित न था,
साहब तुमने तो कुर्सी को अमीरों की रखैल बना डाली,
हम जनता खुद का ध्यान रखे जेटली जी ने कह डाली,
अब बताओ तुम रोज गरीबी-किसानी पेले रहते हो,
जहाँ देखो तुम भारत निर्माण की डींगे रेले रहते हो,
जितना तुमने प्रचारों पर खर्च कराया कामों का,
इतने के न काम हुए है लुटाया जितने दामों का,
अब तो वक्त निकल चुका कुर्सी छोड़ने की बारी है,
जन मानस बेहाल हुआ सबक सिखाने की तैयारी है,
जनता भूखी थकी हुई और चहुं ओर हाहाकार है,
पगले भक्त चिल्ला रहे है की बागों में बहार है,
___आज दुर्दशा सिर्फ नासमझी के कारण हुई, क्युकी उन्हें तो अमीरों के बीच में रहने की आदत है..तब गरीबों की बातें तो पन्नों में लिखी हुई आती है फिर मंच से आप चित्रित कर देते हो सब.....अब भला करे भगवान हमारा____
           
         "पंक्तियाँ :-  अश्विनी यादव"

सोमवार, 28 मार्च 2016

किसान मर गया

बड़ी चहल-पहल मची है । नेता जी शोक सभा में जा रहे है । उन्हें किस किस बात पे क्या क्या बोलना है, पहले किससे मिलना है। वहाँ का लोकल नेता कौन है पता लगाया जा रहा है।
-----वही दूसरी ओर एक घर में चारपाई पे एक जर्जर हुई शरीर। अगल बगल कई बिलखते चेहरे। जिसमे एक लगभग पागल सी दिखने वाली औरत.....और तीन बच्चे। जिनकी हालत कुपोषण के साये में जीवंत है।
बाजार में, सदन में, मन्दिर के ट्रस्ट की आफ़िस, नमाज के बाद मस्जिद के बगल में, नुक्कड़ पे  बार बार लगातार एक चर्चा बड़ी गर्म चल रही है,,,"फिर एक किसान मर गया"....
'किसान मर गया'
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चर्चाएँ चल रही चहुँओर
कि एक किसान मर गया,
संवेदना लेकर हर नेता
उसके घर पे है गया,
बात सदन में उठ रही
मौत क्यूँ हुई उसकी,
सत्ता कह रही कल की
ठंड से मर गया,
विरोधी पुरज़ोर कह रहे
वो कर्ज में डूबा था,
फसले हो गयी बर्बाद
वो डरके मर गया,
पर राहत देने को
कोई आगे नही आया,
मुआवज़े का ऐलान हुआ
पर मजाक बनकर रह गया,
अपने दो वक्त की रोटी को
जो सैकडों पेट भरता था,
वो जमीर का अमीरजादा
बेनाम किसान मर गया,
पर एक बात सच्ची सी
छोटी सी बच्ची बोली,
बाबू कई दिन से भूखे थे
उन्होंने खा ली जहर गोली,
कुछ ठेकेदार मजहब के
पूछ रहे है सबसे,
जरा पता करो जल्दी
हिंदू था कि मुसलमान मर गया,
ये दास्तान सुन करके
मेरा इन्सान मर गया,
बाँट लो दरख्तों को
तख्तों को ओ जल्लादों,
तेरा खुदा मर गया
और मेरा राम मर गया..
हलचल है शहर में की
फिर से एक किसान मर गया...
――
कुछ बेहूदे अभी तक कुतर्क कर रहे है आपस में ..
'यार उसके पत्नी का अफेयर था शायद,,, नही बे उसकी कही और सेटिंग थी उसी के चक्कर में,  अरे पीने के चक्कर में लड़ाई की होगी और फिर सुसाइड कर लिया होगा...
--©®---कवि/लेखक― अश्विनी यादव