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रविवार, 7 अक्टूबर 2018

फ़िराक़-ए-गम

जा रही हो....रुक जाओ न प्लीज़ प्लीज़।

वो जा रही है मेरी दुनिया से दूर बहुत दूर , सब कोशिश कर चुका हूँ उसको रोकने की,,,,,, पर लगता है शायद वो ख़ुद भी नहीं रुकना चाहती है
आज ऐसा लग रहा है मेरा सब कुछ कहीं छूट जा रहा है जिसे मैं पाना चाहता हूँ लेकिन मेरे होंठ चुपचाप बस ख़ुद में घुटे जा रहें हैं।
   मुझे ऐसा महसूस हो रहा है कि उसके जाने के बाद मेरी दुनिया में रंग के नाम पर सिर्फ शायद काला रंग और एहसास के नाम पर उदासी ही बचेगी.....।
    रोज सुबह लालिमा लिए आएगी, शाम भी हसीन होगी सबकी होगी लेकिन मेरी जिंदगी में तुम्हारी मुहब्बत न होगी तो सुबह भी काली ही होगी मेरी।
   मुझे लग रहा है किसी बड़े रेगिस्तान में हूँ जिसमे सबसे ज्यादा जरूरत पानी की, छाँव की महसूस हो रही है और पानी तुम्हारी मुहब्बत है छाँव तुम्हारा मेरे साथ होना ।
काश ! तुम मुझे समझ पाती...... और बस किसी भी बहाने से रुक जाती।

चुपचाप जा रही हो मेरी जाना,
कम से कम एक दफ़ा झगड़ लेती,
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   अश्विनी यादव

सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

जन्मोत्सव लाल बहादुर शास्त्री जी का

लाल बहादुर शास्त्री जी के जन्मोत्सव पर नमन करते हुए हार्दिक शुभकामनाएं समस्त भारतवंशियों को।

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपनी कुशल नेतृत्व क्षमता, क्रांतिकारी व्यक्तित्व और जन कल्याणी विचारों के लिए हमेशा याद किए जाते हैं। शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। वह अपने देश और देशवासियों के सम्मान और रक्षा के लिए कुछ भी करने को तैयार थे, जो कि उनके व्यक्तित्व को महान बनाता है। आपको बता दें कि इसी के चलते उन्होंने देश को मुसीबत से निकालने के लिए भोजन करना भी छोड़ दिया था और साथ ही वेतन लेने से भी मना कर दिया था।

हम बताते है कि क्यों छोड़ दिया था खाना...

1962 के युद्ध में भारत को बहुत नुकसान हुआ था। इसी का फायदा उठाने के लिए पाकिस्तान ने 1965 में युद्ध छेड़ दिया। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाक को मुंहतोड़ जवाब देकर हरा दिया। युद्ध के दौरान भारत में वित्तीय संकट गहरा गया था। ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री ने रामलीला मैदान से लोगों से अपील की कि, सभी अपने फालतू के खर्चे छोड़ दें और हफ्ते में एक दिन उपवास जरूर रखें। जिससे भारत को अमेरिका से गेंहू ज्यादा ना खरीदना पड़े और भारत को जल्दी वित्तीय संकट से उबर पाए। इसलिए उन्होंने खुद भी एक दिन उपवास रखना शुरू कर दिया था।

वेतन लेने से कर दिया था मना...

इस वित्तीय संकट से देश को निकालने और देशवासियों के सामने प्रेरणा बनने के लिए उन्होंने अपना वेतन लेने से भी मना कर दिया था। यहां तक कि कहा जाता है कि एक बार शास्त्री जी विदेश जा रहे थे किसी बैठक के लिए  उनकी धोती फटी हुई थी तो उन्होंने नई धोती की जगह फटी धोती को ही रफ़ू करवाकर पहने और सम्मेलन में चले गए।
आज इस पावन अवसर पे ऐसी महान व्यक्तित्व के सुकर्मों का संस्मरण करते हुए बधाई प्रेषित करतें है ।

पसीना बहाना पड़ता है खेतों में,
ऐसे ही कोई किसान नहीं होता,
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  अश्विनी यादव

सोमवार, 17 सितंबर 2018

सच बोल देना चाहिए

सच बोल देता हूँ तो वो दोस्त मुझसे नफ़रत करने लगता है, क्योंकि वो सच उसके ख़िलाफ़ हो जाता है। मैंने कभी भी उसको झूठा नहीं कहा, पर मैंने नजरिये से जो देखा सच बोल दिया।
     हालांकि मैं भी उसे अच्छा लगता, बस उसके खाईं में गिरने तक उसकी हाँ में हाँ मिलाता रहता।
     ख़ैर इसका एक और तरीका है मैं उसके हर किये पर टोकना बंद कर दूँ। जिसके लिए मुझे अपने आँख, कान बन्द करना पड़ेगा।

बुधवार, 12 सितंबर 2018

कैनवास लेकर बैठो

तुम कैनवास लेकर बैठो
मैं तुम्हारे इर्द-गिर्द
खोया खोया सा मिलूँगा
अपनी सांसों में भिगोकर
चाहतों के रंग से
इक तस्वीर बना देना
जिसमें मेरी मुहब्बत
तुम्हारे लिए पागलपन
और हमारी कहानी
झलकती हो
हाँ जान बना देना...
    
      ― अश्विनी यादव​​

मंगलवार, 11 सितंबर 2018

तुम जा रही हो जाना

मैं किसी सरसों के पौधे सा
मदमस्त झूम रहा हूँ,
तुम इक बेपरवाह तितली सी
हवा संग घूम रही हो,
लाखों पौधों में मुझ एक को
तुम्हारा चुन लेना ही,
सबसे अनमोल बना दिया
उस पूरे खेत भर में,
तुम्हारा आना औ चूम लेना
इत्तेफ़ाक नहीं है,
ये ख़ुदा की मर्ज़ी है शायद
या शिद्दत की चाहत,
तुम्हें देख मेरा खिल जाना
झूम उठना इश्क़ है,
उफ़्फ़ ! तुम जा रही हो क्या
मेरे नीरस होते ही,
जाओ पर मालूम हो तुम्हें
इतना ए मेरी जाना,
जिंदा की कोशिश करूँगा
जो मुमकिन नहीं है,

    ― अश्विनी यादव​​

रविवार, 2 सितंबर 2018

कृष्ण जन्माष्टमी ( तुम्हारी शरण चाहिए है )

हर जीवन का हर क्षण चाहिए है
हमको तुम्हारी शरण चाहिए है,

सारा जीवन गुजर जाएगा यूँ
दर्श.न को तेरा चरण चाहिए है,

तुम्हारे चरण में शरण चाहिए है....

माखन, मिश्री, वंशी औ गइया
ऐसी ही धरती गगन चाहिए है,

रुक्मिणी, राधा औ बावली मीरा
प्रेम में सबको मगन चाहिए है,

तुम्हारे चरण में शरण चाहिए है......

जैसे अर्जुन को लड़ना सिखाया
वैसे ही हमको जतन चाहिए है,

कंस को मार के अधर्म मिटाया
हमको वहीं वो किशन चाहिए है,

तुम्हारे चरण में शरण चाहिए है।

     ― अश्विनी यादव

रविवार, 17 जून 2018

Happy Father's Day

  
       कई रंग अपनी आंखों में पिरोना और फिर उसे पूरा न कर पाना.....लेकिन अपने दूसरे जनम में उसे साकार करने की पूरी कोशिश करना, यहीं जो पहला जन्म है वो पुत्र के रूप में है और दूसरा जनम ख़ुद का पिता बनने के बाद अपने बच्चों की जिंदगी में अपने अधूरे सपनों को साकार होते हुए देखना ही पिता का जीवन है।

           आज मैं चाचा हूँ, यानी कि एक बच्चे के पिता का भाई हूँ, और वो बच्चा जो कि मेरी भतीजी भूमि है.....   मेरे पैरों के, सर के बाल नोंच लेती है, कंधे पर दाँत चुभा देती है, चेहरे पर तो उसके नाखूनों के इतने दस्खत हैं की गिनती नहीं.......फिर भी मुझे कोई शिकायत नही है। मैं उसे कभी कभार डांटता भी हूँ लेकिन उसकी मुस्कान के लिए कुछ भी करने को तैयार रहता हूँ.........ये एक चाचा की जिंदगी है तो,
    ख़ुदा जाने या एक पिता जाने की एक पिता की जिंदगी कैसी होती है।
               मैंने देखा है अपने पिता जी को की अपनी कई इच्छाओं की बलि चढ़ा कर हमारे चेहरे पर ख़ुशी की कोशिश करते हैं। हम फिर भी शिक़ायत रखते हैं।

   चलो छोड़ो बस इतना जानो की हम एक किताब हैं, और हम पर जो ज़िल्द चढ़ी है वो बड़े भैया हैं, और जिस बस्ते में हम रखे हुए एकदम सुरक्षित है न वो पिता जी हैं,,,,,,बस यहीं हम है ये हमारे पिता जी है।

     पहले तो पैदा हुए बेटे की जिंदगी बंधी हुई बाप के हाथों, फिर बाप बन गए तो बच्चों के जिंदगी में अपनी जिंदगी, और जब दादा बन गए तो बचपन की जिंदगी जो आज़ाद भी है और आश्रित भी।
    लेकिन एक जीवन तभी मुक़म्मल होता है जब हम परिवार में हो,चाचा,पति,पापा,बाबा,...... बनते हैं।
  
         "मेरे लिए जिंदगी बस इतनी सी है,,

           ― अश्विनी यादव

#HappyFather'sDay