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मंगलवार, 22 जून 2021

ग़ज़ल

उसने गंगा से धुलवाया था गोकुल,
कुछ यूँ उसने शुद्ध कराया था गोकुल,

कोई उसको समझाओ कि माधव ने
आँख बनाकर ख़ुद पे सजाया था गोकुल

गोकुलधाम भले ही छूटा हो लेकिन
कान्हा जी ने कब बिसराया था गोकुल

प्रियतम सह जाते हैं सारे रंज-ओ-ग़म
सबसे सच्ची प्रीत निभाया था गोकुल

प्रेम बिना है दुनिया सूनी सच मानो
चाहत में घर बार लुटाया था गोकुल

     
     ~ अश्विनी यादव

रविवार, 2 सितंबर 2018

कृष्ण जन्माष्टमी ( तुम्हारी शरण चाहिए है )

हर जीवन का हर क्षण चाहिए है
हमको तुम्हारी शरण चाहिए है,

सारा जीवन गुजर जाएगा यूँ
दर्श.न को तेरा चरण चाहिए है,

तुम्हारे चरण में शरण चाहिए है....

माखन, मिश्री, वंशी औ गइया
ऐसी ही धरती गगन चाहिए है,

रुक्मिणी, राधा औ बावली मीरा
प्रेम में सबको मगन चाहिए है,

तुम्हारे चरण में शरण चाहिए है......

जैसे अर्जुन को लड़ना सिखाया
वैसे ही हमको जतन चाहिए है,

कंस को मार के अधर्म मिटाया
हमको वहीं वो किशन चाहिए है,

तुम्हारे चरण में शरण चाहिए है।।

     ― अश्विनी यादव