सच बोल देता हूँ तो वो दोस्त मुझसे नफ़रत करने लगता है, क्योंकि वो सच उसके ख़िलाफ़ हो जाता है। मैंने कभी भी उसको झूठा नहीं कहा, पर मैंने नजरिये से जो देखा सच बोल दिया।
हालांकि मैं भी उसे अच्छा लगता, बस उसके खाईं में गिरने तक उसकी हाँ में हाँ मिलाता रहता।
ख़ैर इसका एक और तरीका है मैं उसके हर किये पर टोकना बंद कर दूँ। जिसके लिए मुझे अपने आँख, कान बन्द करना पड़ेगा।
हमें प्रयास करते रहना चाहिए ज्ञान और प्रेम बाँटने का, जिससे एक सभ्य समाज का निर्माण किया जा सके।
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सोमवार, 17 सितंबर 2018
सच बोल देना चाहिए
सोमवार, 20 मार्च 2017
हर दिन नया सा था
शाम हो रही है यार
तुम सबकी याद कसक रही है,
बुलबुला बनके
मेरे दिली सरोवर में तैर रहे है,
वो जब टहलते थे कभी कभी
'राम विलास' के चाय की चुस्की
फिर 'गुप्ता जी' के पकौड़े
चलते-चलते 'माखन भोग'
ज्यों ही पंहुचते थे जेब में
लगभग आग ही लग जाती थी,
इस उलट फेर का तमाशा
और मजेदार हो जाता था,
जब वही रास्ते 'जूनियर्स' को नमस्ते
सर यादआ जाता था,
छोटे भाइयों के लिए अपना
फर्ज अदा करते थे मिल बाँट के,
टहलते टहलते स्टेशन का भी
जायजा लेते हुए,
मन्दिर जा के प्रभु को अक्सर
याद करते थे हम...
हम अच्छे थे तब हम सच्चे थे,
अब जोड़ तोड़ गुणा गणित का
हिसाब-किताब का प्रश्न हो या
अपने रुतबे की बात आ जाये
लेकिन प्यार हमारा वही था
वहीं है शायद वहीं रहेगा...
भले स्वाद चाय से काफ़ी जैसा हो,
लेकिन आज भी तेरी फ़िक्र
किसी चूल्हे पे रखे 'दूध' जैसा है..
उबलता है, और बहने लगता है यारों....
―आप में से ही एक, आपका
"अश्विनी यादव"