कुल पेज दृश्य

aadidev लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
aadidev लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 30 जून 2017

शिव आराधना

तुम आदि हो अनादि हो अनन्त हो अगाध हो,
तुम काल हो दयालु हो सभी संत के साथ हो,
तुम अघोर हो विभोर हो विनाशक का रूप हो,
तुम ही धरा हो प्रकृति हो समूल व्याप्त धूप हो,
तुम सत्य हो सशक्त हो औ शून्य हो समस्त हो,
तुम ही त्रिपुंड हो त्रिलोचन हो प्राण हो रक्त हो,
तुम शूल हो त्रिशूल हो  शमी पत्र और फूल हो,
तुम कण हो अगण हो  ब्रम्हाण्ड हो समूल हो,
तुम विषाक्त हो अमरत्व हो कैलाशी साध्य हो,
तुम ही भक्त रक्षक हो अश्विनी के आराध्य हो,

  (    शिव आराधना :- अश्विनी यादव   )

अति पवित्र सावन माह की हार्दिक शुभकामनाएं।

सोमवार, 20 मार्च 2017

शिव सर्वत्र है

शिव ही सब है, सब में शिव है,
शिव ब्रम्ह है, जहाँ भी शिव है,
दुःख भी शिव है, सुख भी शिव है,
मन भी शिव है, मुख भी शिव है,
शिव ही ओज है, तेज भी शिव है,
शिव समस्या, शोध भी शिव है,
शिव छुपा है, खोज भी शिव है,
शिव ही मिथ्या, सत्य भी शिव है,
शिव आकार, निराकार शिव है,
शिव चमत्कार, विचार भी शिव है,
शिव ही नियम है, कर्म भी शिव है,
शिव ही सुन्दर, धर्म भी शिव है,
शिव है जन-जन के रग - रग में,
शिव निहित हैं हर में इक कण में

शिव संसार है, शिव ही सकल है,

शिव समुद्र है, शिव ही जल  है,

शिव सर्वस्व, ब्रम्हाण्ड भी शिव है,
शिव ही आदि है, अनन्त भी शिव है,
___जय शिव शंकर___


           ― अश्विनी यादव